Shree Ramcharitmans- Balkand 41 – Vishwamitra’s entry in Janakpur along with Shri Ram-Laxman

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चौपाई:

*चले राम लछिमन मुनि संगा। गए जहाँ जग पावनि गंगा॥
गाधिसूनु सब कथा सुनाई। जेहि प्रकार सुरसरि महि आई॥1॥

भावार्थ:-श्री रामजी और लक्ष्मणजी मुनि के साथ चले। वे वहाँ गए, जहाँ जगत को पवित्र करने वाली गंगाजी थीं। महाराज गाधि के पुत्र विश्वामित्रजी ने वह सब कथा कह सुनाई जिस प्रकार देवनदी गंगाजी पृथ्वी पर आई थीं॥1॥

Meaning :- Shri Ramji and Laxmanji went with Muni. They went to the place where Gangaji, the purifier of the world, was. Vishwamitraji, the son of Maharaj Gandhi, narrated the entire story as to how Devnadi Gangaji had come to earth ॥1॥

*तब प्रभु रिषिन्ह समेत नहाए। बिबिध दान महिदेवन्हि पाए॥
हरषि चले मुनि बृंद सहाया। बेगि बिदेह नगर निअराया॥2॥

भावार्थ:-तब प्रभु ने ऋषियों सहित (गंगाजी में) स्नान किया। ब्राह्मणों ने भाँति-भाँति के दान पाए। फिर मुनिवृन्द के साथ वे प्रसन्न होकर चले और शीघ्र ही जनकपुर के निकट पहुँच गए॥2॥

Meaning :- Then the Lord bathed (in Gangaji) along with the sages. Brahmins received donations of various kinds. Then he went happily with Munivrind and soon reached near Janakpur ॥2॥

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*पुर रम्यता राम जब देखी। हरषे अनुज समेत बिसेषी॥
बापीं कूप सरित सर नाना। सलिल सुधासम मनि सोपाना॥3॥

भावार्थ:-श्री रामजी ने जब जनकपुर की शोभा देखी, तब वे छोटे भाई लक्ष्मण सहित अत्यन्त हर्षित हुए। वहाँ अनेकों बावलियाँ, कुएँ, नदी और तालाब हैं, जिनमें अमृत के समान जल है और मणियों की सीढ़ियाँ (बनी हुई) हैं॥3॥

Meaning :- When Shri Ramji saw the beauty of Janakpur, he along with his younger brother Laxman became very happy. There are many baolis, wells, rivers and ponds, in which there is water like nectar and there are steps (made) of gems.॥3॥

*गुंजत मंजु मत्त रस भृंगा। कूजत कल बहुबरन बिहंगा॥
बरन बरन बिकसे बनजाता। त्रिबिध समीर सदा सुखदाता॥4॥

भावार्थ:-मकरंद रस से मतवाले होकर भौंरे सुंदर गुंजार कर रहे हैं। रंग-बिरंगे (बहुत से) पक्षी मधुर शब्द कर रहे हैं। रंग-रंग के कमल खिले हैं। सदा (सब ऋतुओं में) सुख देने वाला शीतल, मंद, सुगंध पवन बह रहा है॥4॥

Meaning :- Bumblebees are humming beautifully after being intoxicated with nectar. Colorful (many) birds are making sweet words. Colorful lotuses are in bloom. The cool, slow, fragrant wind that always gives happiness (in all seasons) is blowing ॥4॥

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दोहा:

*सुमन बाटिका बाग बन बिपुल बिहंग निवास।
फूलत फलत सुपल्लवत सोहत पुर चहुँ पास॥212।

भावार्थ:-पुष्प वाटिका (फुलवारी), बाग और वन, जिनमें बहुत से पक्षियों का निवास है, फूलते, फलते और सुंदर पत्तों से लदे हुए नगर के चारों ओर सुशोभित हैं॥212॥

Meaning :- Flower gardens (Phulvari), gardens and forests, in which many birds reside, blossoming, flourishing and laden with beautiful leaves adorn the city ॥212॥

चौपाई:

*बनइ न बरनत नगर निकाई। जहाँ जाइ मन तहँइँ लोभाई॥
चारु बजारु बिचित्र अँबारी। मनिमय बिधि जनु स्वकर सँवारी॥1॥

भावार्थ:-नगर की सुंदरता का वर्णन करते नहीं बनता। मन जहाँ जाता है, वहीं लुभा जाता (रम जाता) है। सुंदर बाजार है, मणियों से बने हुए विचित्र छज्जे हैं, मानो ब्रह्मा ने उन्हें अपने हाथों से बनाया है॥1॥

Meaning :- It is not possible to describe the beauty of the city. Wherever the mind goes, it gets tempted. There is a beautiful market, there are quaint balconies made of gems, as if Brahma had made them with his own hands.॥1॥

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*धनिक बनिक बर धनद समाना। बैठे सकल बस्तु लै नाना।
चौहट सुंदर गलीं सुहाई। संतत रहहिं सुगंध सिंचाई॥2॥

भावार्थ:-कुबेर के समान श्रेष्ठ धनी व्यापारी सब प्रकार की अनेक वस्तुएँ लेकर (दुकानों में) बैठे हैं। सुंदर चौराहे और सुहावनी गलियाँ सदा सुगंध से सिंची रहती हैं॥2॥

Meaning :- Best rich merchants like Kuber are sitting (in the shops) carrying all kinds of things. Beautiful crossroads and pleasant streets are always irrigated with fragrance ॥2॥

*मंगलमय मंदिर सब केरें। चित्रित जनु रतिनाथ चितेरें॥
पुर नर नारि सुभग सुचि संता। धरमसील ग्यानी गुनवंता॥3॥

भावार्थ:-सबके घर मंगलमय हैं और उन पर चित्र कढ़े हुए हैं, जिन्हें मानो कामदेव रूपी चित्रकार ने अंकित किया है। नगर के (सभी) स्त्री-पुरुष सुंदर, पवित्र, साधु स्वभाव वाले, धर्मात्मा, ज्ञानी और गुणवान हैं॥3॥

Meaning :- Everyone’s houses are auspicious and pictures are engraved on them, which are as if painted by a painter in the form of Cupid. (All) men and women of the city are beautiful, pious, pious, pious, knowledgeable and virtuous ॥3॥

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*अति अनूप जहँ जनक निवासू। बिथकहिं बिबुध बिलोकि बिलासू॥
होत चकित चित कोट बिलोकी। सकल भुवन सोभा जनु रोकी॥4॥

भावार्थ:-जहाँ जनकजी का अत्यन्त अनुपम (सुंदर) निवास स्थान (महल) है, वहाँ के विलास (ऐश्वर्य) को देखकर देवता भी थकित (स्तम्भित) हो जाते हैं (मनुष्यों की तो बात ही क्या!)। कोट (राजमहल के परकोटे) को देखकर चित्त चकित हो जाता है, (ऐसा मालूम होता है) मानो उसने समस्त लोकों की शोभा को रोक (घेर) रखा है॥4॥

Meaning :- Where Janakji’s most unique (beautiful) residence (palace) is, even the gods get tired (stunned) on seeing the luxury (aishwarya) there (what to talk about humans!). Seeing the coat (the ramparts of the palace), the mind is amazed, (it seems) as if it has stopped (surrounded) the beauty of all the worlds.॥4॥

दोहा:
*धवल धाम मनि पुरट पट सुघटित नाना भाँति।
सिय निवास सुंदर सदन सोभा किमि कहि जाति॥213॥

भावार्थ:-उज्ज्वल महलों में अनेक प्रकार के सुंदर रीति से बने हुए मणि जटित सोने की जरी के परदे लगे हैं। सीताजी के रहने के सुंदर महल की शोभा का वर्णन किया ही कैसे जा सकता है॥213॥

Meaning :- In the bright palaces, there are many types of beautifully made gold zari curtains made of gems. How can one describe the beauty of the beautiful palace where Sitaji resides ॥213॥

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चौपाई:

*सुभग द्वार सब कुलिस कपाटा। भूप भीर नट मागध भाटा॥
बनी बिसाल बाजि गज साला। हय गय रख संकुल सब काला॥1॥

भावार्थ:-राजमहल के सब दरवाजे (फाटक) सुंदर हैं, जिनमें वज्र के (मजबूत अथवा हीरों के चमकते हुए) किवाड़ लगे हैं। वहाँ (मातहत) राजाओं, नटों, मागधों और भाटों की भीड़ लगी रहती है। घोड़ों और हाथियों के लिए बहुत बड़ी-बड़ी घुड़सालें और गजशालाएँ (फीलखाने) बनी हुई हैं, जो सब समय घोड़े, हाथी और रथों से भरी रहती हैं॥1॥

Meaning :- All the doors (gates) of the palace are beautiful, in which the doors of Vajra (strong or shining of diamonds) are fitted. There is a crowd of (subordinate) kings, nuts, Magadhas and Bhats. For horses and elephants, there are huge stables and yards (feelkhanas), which are full of horses, elephants and chariots all the time ॥1॥

*सूर सचिव सेनप बहुतेरे। नृपगृह सरिस सदन सब केरे॥
पुर बाहेर सर सरित समीपा। उतरे जहँ तहँ बिपुल महीपा॥2॥

भावार्थ:-बहुत से शूरवीर, मंत्री और सेनापति हैं। उन सबके घर भी राजमहल सरीखे ही हैं। नगर के बाहर तालाब और नदी के निकट जहाँ-तहाँ बहुत से राजा लोग उतरे हुए (डेरा डाले हुए) हैं॥2॥

Meaning :- There are many brave men, ministers and generals. Their houses are also like royal palaces. Many kings have landed (encamped) everywhere near the pond and river outside the city ॥2॥

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*देखि अनूप एक अँवराई। सब सुपास सब भाँति सुहाई।
कौसिक कहेउ मोर मनु माना। इहाँ रहिअ रघुबीर सुजाना॥3॥

भावार्थ:-(वहीं) आमों का एक अनुपम बाग देखकर, जहाँ सब प्रकार के सुभीते थे और जो सब तरह से सुहावना था, विश्वामित्रजी ने कहा- हे सुजान रघुवीर! मेरा मन कहता है कि यहीं रहा जाए॥3॥

Meaning :-(While there) Seeing a unique mango orchard, where all kinds of good things were there and which was pleasant in every way, Vishwamitraji said – O Sujan Raghuveer! My mind tells me to stay here ॥3॥

*भलेहिं नाथ कहि कृपानिकेता। उतरे तहँ मुनि बृंद समेता॥
बिस्वामित्र महामुनि आए। समाचार मिथिलापति पाए॥4॥

भावार्थ:-कृपा के धाम श्री रामचन्द्रजी ‘बहुत अच्छा स्वामिन्‌!’ कहकर वहीं मुनियों के समूह के साथ ठहर गए। मिथिलापति जनकजी ने जब यह समाचार पाया कि महामुनि विश्वामित्र आए हैं,॥4॥

Meaning :- Shri Ramchandraji, the abode of grace ‘Very good master!’ Having said this, he stayed there with a group of sages. When Mithilapati Janakji got the news that Mahamuni Vishwamitra has come, ॥4॥

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दोहा:

*संग सचिव सुचि भूरि भट भूसुर बर गुर ग्याति।
चले मिलन मुनिनायकहि मुदित राउ एहि भाँति॥214॥

भावार्थ:-तब उन्होंने पवित्र हृदय के (ईमानदार, स्वामिभक्त) मंत्री बहुत से योद्धा, श्रेष्ठ ब्राह्मण, गुरु (शतानंदजी) और अपनी जाति के श्रेष्ठ लोगों को साथ लिया और इस प्रकार प्रसन्नता के साथ राजा मुनियों के स्वामी विश्वामित्रजी से मिलने चले॥214॥

Meaning :- Then he took with him many warriors, best Brahmins, Guru (Shatanandji) and the best people of his caste (honest, self-devotee) ministers of the pure heart and thus happily went to meet King Vishwamitraji, the master of the sages.॥214 ॥

चौपाई:

*कीन्ह प्रनामु चरन धरि माथा। दीन्हि असीस मुदित मुनिनाथा॥
बिप्रबृंद सब सादर बंदे। जानि भाग्य बड़ राउ अनंदे॥1॥

भावार्थ:-राजा ने मुनि के चरणों पर मस्तक रखकर प्रणाम किया। मुनियों के स्वामी विश्वामित्रजी ने प्रसन्न होकर आशीर्वाद दिया। फिर सारी ब्राह्मणमंडली को आदर सहित प्रणाम किया और अपना बड़ा भाग्य जानकर राजा आनंदित हुए॥1॥

Meaning :- The king bowed down by keeping his head at the feet of the sage. Vishwamitra, the master of the sages, was pleased and blessed him. Then bowed down to the entire Brahmin congregation with respect and the king was overjoyed knowing his great fortune ॥1॥

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*कुसल प्रस्न कहि बारहिं बारा। बिस्वामित्र नृपहि बैठारा॥
तेहि अवसर आए दोउ भाई। गए रहे देखन फुलवाई॥2॥

भावार्थ:-बार-बार कुशल प्रश्न करके विश्वामित्रजी ने राजा को बैठाया। उसी समय दोनों भाई आ पहुँचे, जो फुलवाड़ी देखने गए थे॥2॥

Meaning :- Vishwamitraji made the king sit by repeatedly asking skilled questions. At the same time both the brothers arrived, who had gone to see Phulwadi ॥2॥

*स्याम गौर मृदु बयस किसोरा। लोचन सुखद बिस्व चित चोरा॥
उठे सकल जब रघुपति आए। बिस्वामित्र निकट बैठाए॥3॥

भावार्थ:-सुकुमार किशोर अवस्था वाले श्याम और गौर वर्ण के दोनों कुमार नेत्रों को सुख देने वाले और सारे विश्व के चित्त को चुराने वाले हैं। जब रघुनाथजी आए तब सभी (उनके रूप एवं तेज से प्रभावित होकर) उठकर खड़े हो गए। विश्वामित्रजी ने उनको अपने पास बैठा लिया॥3॥

Meaning :- Both the Kumaras of Shyam and Gaur Varna of Sukumar Kishore are the ones who give pleasure to the eyes and steal the mind of the whole world. When Raghunathji came, everyone (impressed by his beauty and glory) stood up. Vishwamitraji made him sit near him ॥3॥

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*भए सब सुखी देखि दोउ भ्राता। बारि बिलोचन पुलकित गाता॥
मूरति मधुर मनोहर देखी भयउ बिदेहु बिदेहु बिसेषी॥4॥

भावार्थ:-दोनों भाइयों को देखकर सभी सुखी हुए। सबके नेत्रों में जल भर आया (आनंद और प्रेम के आँसू उमड़ पड़े) और शरीर रोमांचित हो उठे। रामजी की मधुर मनोहर मूर्ति को देखकर विदेह (जनक) विशेष रूप से विदेह (देह की सुध-बुध से रहित) हो गए॥4॥

Meaning :- Everyone was happy to see both the brothers. Everyone’s eyes were filled with water (tears of joy and love welled up) and their bodies were thrilled. Videha (Janaka) especially became Videha (devoid of the mind of the body) after seeing the sweet charming idol of Ramji ॥4॥

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